साल का अंत नज़दीक, मन बेचैन।
हर साल का अंत शायद इंसान का सबसे बेचैन दौर होता है। पूरे साल ज़िंदगी अच्छी चली हो तो ठीक, लेकिन जिनकी अच्छी नहीं चली? साल का अंत सब खोलकर रख देता है। 2012 में सचमुच थोड़ा भ्रमित रह…
GANWEN / समय के क्रम में पढ़ें
हर साल का अंत शायद इंसान का सबसे बेचैन दौर होता है। पूरे साल ज़िंदगी अच्छी चली हो तो ठीक, लेकिन जिनकी अच्छी नहीं चली? साल का अंत सब खोलकर रख देता है। 2012 में सचमुच थोड़ा भ्रमित रह…
विचार सिर्फ़ तुम्हारा होना शायद संभव न हो, लेकिन उसे अमल में लाने वाला सिर्फ़ तुम हो सकते हो। मेहनत करो।
किसी इंसान से प्यार करो या किसी चीज़ से, बात एक ही है, है न? अगर पछतावा हो जाए, तो क्या फिर भी विश्वास रहेगा?
लगता है जीवन में ऊर्जा संरक्षण का नियम लागू नहीं होता , फूलों का एक गुलदस्ता ही किसी छोटी-सी लड़की को हुआ मुलान बनाने के लिए काफ़ी है; फिर उसमें हिम्मत आ जाती है कि ज़िंदगी का पहिय…
बेस्वाद, उबाऊ, दिन पर दिन जीते जाना—आख़िर इंसान किसलिए जीता है? अपनी इज़्ज़त साबित करने के लिए? या कुछ और? मुझे नहीं पता। चलो, यहीं रुकते हैं। इतनी भावुक बातें किसी काम की नहीं; खु…