हर साल का अंत शायद इंसान का सबसे बेचैन दौर होता है। पूरे साल ज़िंदगी अच्छी चली हो तो ठीक, लेकिन जिनकी अच्छी नहीं चली? साल का अंत सब खोलकर रख देता है। 2012 में सचमुच थोड़ा भ्रमित रहा, बहुत कुछ मनमुताबिक़ नहीं हुआ। सफलता-असफलता को अपेक्षाकृत तर्क से देखता हूँ। अपनी स्थिति देखूँ तो अनगिनत चीनी लोगों में मैं काफ़ी उत्कृष्ट हूँ। हमउम्रों को देखो, पता नहीं कैसी ज़िंदगी जी रहे हैं। चलो, बस, आत्ममुग्ध नहीं बनना। Wen Gan का ब्लॉग अपनी ज़िंदगी के अलग-अलग रंग दर्ज करता है, किसी बंधन के बिना।

जवानी की जल्दबाज़ी के मुक़ाबले उम्र बढ़ने के साथ भीतर का ग़ुस्सा बढ़ता ही गया है, पर सहनशक्ति भी बढ़ी है और बहुत-सी बातें उदारता से छोड़ सकता हूँ। उम्र बढ़ने पर सोच, शरीर और बोलचाल में खुद को अधिक खुला पाता हूँ। हर उम्र में लक्ष्य रहे—प्यार, काम, भविष्य, सम्मान। अब धीरे-धीरे शांत हो रहा हूँ, उस जीवन के लिए जिसे मैं अच्छा समझता हूँ! मैं नायक नहीं, साधारण इंसान हूँ और साधारण सोच से दुनिया देखता हूँ। जीना आसान नहीं; हम सब एक-दूसरे का हौसला बढ़ाएँ।

यह बिना किसी क्रम की लिखाई है, जैसा सोचता हूँ वैसा लिख देता हूँ। यही Wen Gan की डायरी है।