बेस्वाद, उबाऊ, दिन पर दिन जीते जाना—आख़िर इंसान किसलिए जीता है? अपनी इज़्ज़त साबित करने के लिए? या कुछ और? मुझे नहीं पता। चलो, यहीं रुकते हैं। इतनी भावुक बातें किसी काम की नहीं; खुद बने रहने की कोशिश करो।