रात गहरी हो गई है, पता नहीं तुम चैन से सो रहे हो या नहीं।
बेस्वाद, उबाऊ, दिन पर दिन जीते जाना—आख़िर इंसान किसलिए जीता है? अपनी इज़्ज़त साबित करने के लिए? या कुछ और? मुझे नहीं पता। चलो, यहीं रुकते हैं। इतनी भावुक बातें किसी काम की नहीं; खु…
GANWEN / समय के क्रम में पढ़ें
बेस्वाद, उबाऊ, दिन पर दिन जीते जाना—आख़िर इंसान किसलिए जीता है? अपनी इज़्ज़त साबित करने के लिए? या कुछ और? मुझे नहीं पता। चलो, यहीं रुकते हैं। इतनी भावुक बातें किसी काम की नहीं; खु…
पहाड़ चढ़कर बहुत थक गया, इसलिए बस एक तस्वीर ली। अब नहाने जा रहा हूँ—पूरा शरीर पसीने से बदबू मार रहा है।
समाज बहुत तेज़ी से बदल रहा है—तकनीक, दौर, पृष्ठभूमि, लोग। इस समय से सबसे आगे कैसे निकला जाए? अभी मुझे इसका जवाब नहीं मिला है! लेकिन Wen Gan ने कसम खाई है कि मरते दम तक पीछे छूटने व…
मैं कभी सिर नहीं झुकाता, हार नहीं मानता। लेकिन अपने ही सामने अचानक कंधे कमज़ोर पड़ जाते हैं। कभी लगता है कि इतना बोझ उठा ही नहीं सकता। मेरी उम्र में ऐसी ज़िंदगी नहीं होनी चाहिए थी,…